जब मन में पुरानी दुखद स्मृतियां सजग हो तो उन्हें भुला देने में ही श्रेष्ठता है |अप्रिय बातों को भूलना आवश्यक है भूलना उतना ही जरुरी है जितना अच्छी बातों का स्मरण करना | यदि तुम शरीर से मन से और आचरण से स्वस्थ होना चाहते हो तो अस्वस्थता की सारी बातें भूल जाओ|मन की किसी अपने ने ही तुम्हे चोट पहुंचाई है , तुम्हारा दिल दुखाया है तो क्या तुम उसे लेकर मानसिक परेशानियों में लगे रहोगे? अरे भाई ! उन कश्टकारक अप्रिय बातों को भुला दो , उधर ध्यान न देकर अचे शुभ कर्मों से मन को केन्द्रितभूत कर दो |
चिंता से मुक्ति पाने का सर्वोत्तम उपाय दुखो को भूलना ही है|

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